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Saturday, January 21, 2012

औरत की कीमत

उसने युँ ही राह चलते मेरी कामत तय कर दी....
मैं बीवी हूँ....मुझे किचन के काम में तोला गया....
हर वक्त के ईंतज़ाम में तोला गया....
मैं बहु हूँ......मुझे दहेज में तोला गया....
मैं बहन भी थी मगर मुझे वहाँ भी तोला गया...
और तब जब मैं प्रेमिका थी,......तब भी.....
अक्सर किसी मोड पर आ कर मेरी कीमत तय की गई....
मानों हर कदम...एक तवायफ और मुझमें......बस कीमतें अलग  अलग थीं.........
युँ तवायफ है भी क्या......मर्द की ज़रुरत का  सामान.....वो तो हर एक औरत है....